• दिन 41: जीवन बदल देने वाले वचन
    Feb 10 2025
    मत्ती 26:47-68, निर्गमन 6:13-8:32, भजन संहिता 19:7-14, द्वारा गुसपैठ की जाती थी)। एक अवसर पर, सभा के बाद रास्ते में एक आदमी ने मेरा पीछा किया। मैं उसके पास गया और उसकी पीठ पर थपथपाया। वहाँ कोई नहीं था। मैंने एक बाइबल निकाली और उसे दे दी। एक पल के लिए, उसकी अभिव्यक्ति लगभग अविश्वसनीय थी। तब उसने अपनी जेब से नये नियम की एक पुस्तक निकाली, जो कि लगभग 100 साल पुरानी थी। पन्ने इतने घिस गए थे कि वे पारदर्शी नज़र आ रहे थे। जब उसने जाना कि उसे एक संपूर्ण बाइबल मिली है, तो वह प्रफुल्लित हो गया, उसने ना ही कुछ अँग्रेज़ी में कहा और ना ही रूसी भाषा में कहा। लेकिन हमने एक दूसरे को गले लगाया और वह रास्ते में खुशी के मारे कूदने लगा। यह उसके लिए ऐसा था जैसे दाऊद के लिए भजन संहिता, परमेश्वर का वचन शुद्ध सोने से भी कीमती है; ये मधु से भी मीठे हैं (भजन संहिता 19:10)। परमेश्वर के वचन इतने कीमती क्यों हैं? यीशु ने कहा है: ‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा’ (मत्ती 4:4)। बी
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  • दिन 40: पाँच बहाने
    Feb 9 2026
    मत्ती 26:31-46, निर्गमन 4:1-6:12, नीतिवचन 4:10-19, यह एक गाना है जिसे ब्रिटिश में दाहसंस्कार के समय अक्सर बजाया जाता है। यह इतिहास का सबसे ज़्यादा पुनर्निर्मित गाना है। इसने 1969 में फ्रॅन्क सिनाट्रा के एलबम *माई वे* में प्रसिद्धि पाई थी। फिलिपीन्स में कराओके बार्स में ‘माई वे’ इतना लोकप्रिय है कि इसे सबसे ज़्यादा मृत्यु के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया जहाँ प्रदर्शन पर हुई बहस हिंसा में बदल गई थी! ‘एंड इट इज़ माई वे! (‘और यह मेरा तरीका है!) यस, इट वाज़ माई वे!’ (हाँ, यह मेरा तरीका था!’) ‘मैंने अपने तरीके से किया’ यह दुनिया का तरीका है। यह यीशु का तरीका नहीं है। यीशु ने कहा था, ‘फिर मेरी नहीं, किंतु तेरी इच्छा पूरी हो जाए’ (मत्ती 26:39)। दूसरी तरफ मूसा, जैसा कि हम आज देखेंगे, अंत में परमेश्वर का तरीका अपनाने से पहले पाँच बहाने बनाए थे।
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  • दिन 39: शत्रुतापूर्ण माहौल में कैसे रहा जाए
    Feb 8 2026
    मत्ती 26:1-30, निर्गमन 1:1-3:22, भजन संहिता 19:1-6, इल्सामी उग्रवाद और संघर्ष के कारण लाखों मसीही लोगों ने इराक और सीरिया से पलायन किया है। मसीही लोगों को उग्रवादी सताव और सामुहिक फांसी का सामना करना पड़ता है। दाईश ने मसीहत को पहले दर्जे का शत्रु घोषित किया है। लाखों मसीही जन ऐसे देशों में रहते हैं जहाँ उन्हें अपने विश्वास के कारण सताया जाता है। कई सरकारें चर्च के विकास को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। बल्कि पारंपरिक इसाई देशों में भी जोशपूर्ण मसीहत के प्रति शत्रुता बढ़ रही है। परमेश्वर के लोगों के लिए शत्रुता कोई नई बात नहीं है। अक्सर लोगों को सफलता, विकास और बड़ी संख्याओं से डराया जाता है। शायद आप भी अपने विश्वास के कारण अपने कार्य के स्थान में या बल्कि अपने परिवार में शत्रुता का सामना कर रहे होंगे। आज का लेखांश शत्रुपूर्ण वातावरण में जीने की सच्चाई को न केवल प्रदर्शित करता है बल्कि वो यह भी बताता है कि हम कैसे जीवित रह सकते हैं और ऐसी शत्रुता के बीच कैसे उन्नति कर सकते हैं।
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  • दिन 38: इनका उपयोग करें या इन्हें गंवा दें
    Feb 7 2026
    मत्ती 25:14-46, अय्यूब 40:3-42:17, भजन संहिता 18:43-50, माइरा हिन्डले बीसवी सदी के सबसे कुख्यात हत्यारों में से एक थी। उनके अपराध अविश्वसनीय रूप से भयानक थे। फिर भी जब वह कैद में थी तो एक व्यक्ति उससे नियमित रूप से मिला करता था। लॉर्ड लॉन्गफोर्ड (1905-2001) एक विवादास्पद व्यक्ति थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन कैदियों से मुलाकात करने में बिता दिया, जिसमें मायरा हिन्डले भी शामिल हैं। फिर भी परमेश्वर के प्रति और जिन कैदियों से वे मिले थे उनके प्रति उनकी दयालुता और उनकी विश्वासयोग्यता पर कोई भी शक नहीं कर सका। जब उनका देहांत हुआ तो सैकड़ों कैदियों ने उनकी अंतिम विदाई में शोक व्यक्त किया जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के बहिष्कृत लोगों लिए विश्वासयोग्यता से लड़ने में बिता दिया। उन्हें आज के लेखांश में दिये गए यीशु के वचनों से प्रेरणा मिली थी। अपने मरणासन पर उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा, 'क्या तुम्हें पता है बाइबल में सबसे महत्त्वपूर्ण उद्धरण कौन सा है? अपने प्रश्न के जवाब में उन्होंने यीशु के वचनों का उद्धरण करते हुए अपने आखिरी शब्द कहे, 'मैं बन्दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए' (मत्ती 25:36)। जीवन कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है जिसमें आपको जीतना ही है। यह कोई चूहे की दौड़ भी नहीं है। जीवन एक बड़ा सौभाग्य और अवसर है। परमेश्वर ने आपको वरदान और क्षमताएं दी हैं, और वह चाहते हैं कि आप उनका उपयोग करें। उनका उपयोग करें या उन्हें गंवा दें। वह हमारे प्रति विश्वासयोग्य हैं और वह चाहते हैं कि हम भी उनके प्रति विश्वासयोग्य बनें।
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  • दिन 37: गोपनीय बातें
    Feb 6 2026
    मत्ती 24:32-25:13, अय्यूब 38:1-40:2, भजन संहिता 18:37-42, जब मेरी यीशु से पहली बार मुलाकात हुई, तो मैंने सोचा कि मुझे विश्वास के बारे में हर एक प्रश्नों के जवाब पता होने चाहिये। मगर मैंने बाइबल का जितना ज़्यादा अध्ययन किया, उतना ही मैंने जाना कि हमें हर एक बातों का जवाब देना ज़रूरी नहीं है। ऐसी बातें भी हैं जो फायदेमंद अज्ञेयवाद या जिसे बाइबल आधारित अज्ञेयवाद के रूप में उल्लेखित किया जा सकता है। कुछ प्रश्न ऐसे हैं जिनका जवाब हम जानते हैं। लेकिन कुछ और अन्य प्रश्न भी हैं जिनका सबसे अच्छा जवाब हम यह दे सकते हैं कि, 'हमें नहीं पता'। गोपनीय बातें हमारे प्रभु परमेश्वर से संबंधित हैं, लेकिन जो बातें प्रगट हैं वह हमारी हैं (व्यवस्थाविवरण 29:29अ)। हमें उन बातों के बारे में स्पष्ट होना ज़रूरी हैं जिनके बारे में बाइबल स्पष्ट हैं। आप जो जान सकते हैं उसके बारे में अज्ञेयवादी न बनें। समान रूप से, जिन बातों के बारे में बाइबल अज्ञेय है उनके बारे में कट्टर न बनें। आज के लेखांश में हम बड़े प्रश्नों के तीन उदाहरण देखेंगे जिन्हें बार - बार पूछा जाता है। इन प्रश्नों के उत्तर ऐसे हैं जिनमे से हम कुछ जानते हैं, और कुछ नहीं जानते।
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  • दिन 36: परमेश्वर के लिए अपने शब्दों का उपयोग करना
    Feb 5 2026
    मत्ती 24:1-31, अय्यूब 35:1-37:24, नीतिवचन 4:1-9, यदि आप वैज्ञानिक शब्दों को शामिल करें, तो अँग्रेज़ी भाषा में 1,000,000 से भी ज़्यादा शब्द हैं। औसतन एक व्यक्ति 20,000 शब्दों को जानता है और एक सप्ताह में 2,000 अलग - अलग शब्दों का उपयोग करता है। स्त्री और पुरूष एक दिन में औसतन 16,000 शब्द बोलते हैं। आपके शब्द मायने रखते हैं, सबसे ज़्यादा महत्त्वपूर्ण यह नहीं है कि आप कितने शब्द बोलते हैं, बल्कि आप किस तरह के शब्दों को चुनते हैं और आप किस उद्देश्य से इन शब्दों का उपयोग करते हैं। आज के लेखांशों में, हम देखेंगे कि आपके शब्दों का उपयोग कैसे किया जा सकता है, जैसे कि प्रेरित याकूब ने बताया है, भलाई के लिए या बुराई के लिए। हर दिन आपके पास एक बड़ी क्षमता होती है: या तो नाश करने के लिए या बनाने के लिए। आज के लेखांश में हम भलाई के लिए, आपके शब्दों का उपयोग करने की छ: कुंजियाँ देखेंगे।
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  • दिन 35: एक प्रभावशाली व्यक्ति कैसे बना जाए
    Feb 4 2026
    मत्ती 23:1-39, अय्यूब 33:1-34:37, भजन संहिता 18:25-36, )। दूसरी तरफ हर एक मसीह को एक लीडर बुलाया जाता है, इस धारणा से कि दूसरे लोग आपको एक उदाहरण के रूप में देखेंगे। अलग - अलग तरह से दूसरों पर आपका प्रभाव पड़ता है। दूसरों को प्रभावित करने के लिए परमेश्वर द्वारा आपको बुलाया जाना एक सौभाग्य की बात है, लेकिन इसमें बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। जी
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  • दिन 34: तीन प्रकार की विजय
    Feb 3 2026
    मत्ती 22:15-46, अय्यूब 30:1-32:22, भजन संहिता 18:16-24, पर होज़े हेनिरिक्वेज़ और उनकी पत्नी से मुलाकात पेश की। उन्होंने बताया कि परमेश्वर से एक चमत्कार के लिए उन्होंने किस तरह से प्रार्थना की। उन्होंने उस पल का वर्णन किया, 22 अगस्त को, जब सुरंग में ड्रिल टूट गई जहाँ पर लोग फंसे हुए थे। उन्होंने लोहे की छड़ों से ड्रिल को ठोका। उन्होंने उस पर पेन्ट स्प्रे किया। उन्होंने उसे लपेटा। उन्होंने इससे ऊपर अनेक संदेश भेजे। जब ड्रिल सतह पर वापस गई तो केवल एक ही संदेश लगा हुआ मिला। यह इस प्रकार था, ‘हम ठीक हैं। बचाव स्थान में 33 जन हैं।’ इससे पहले कि उन्हें ज़मीन के नीचे से ऊपर लाया जाए तब तक कुल उनसठ दिन बीत गए थे। एक अरब से भी ज़्यादा लोगों ने टीवी पर लाइव बचाव कार्य देखा। यह असाधारण दृश्य था जब इन पुरूषों ने, उनके परिवारवालों ने, चिली के लोगों ने और पूरी दुनिया ने इस आश्चर्यजनक विजय का उत्सव मनाया। विश्वास का जीवन चुनौतियों, परेशानियों और परीक्षाओं से भरा हुआ है। लेकिन इसमें विजय के पल भी आते हैं। आज के इस लेखांश में हम तीन प्रकार की विजय देखते हैं। बी
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