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दिन 39: शत्रुतापूर्ण माहौल में कैसे रहा जाए

दिन 39: शत्रुतापूर्ण माहौल में कैसे रहा जाए

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मत्ती 26:1-30, निर्गमन 1:1-3:22, भजन संहिता 19:1-6, इल्सामी उग्रवाद और संघर्ष के कारण लाखों मसीही लोगों ने इराक और सीरिया से पलायन किया है। मसीही लोगों को उग्रवादी सताव और सामुहिक फांसी का सामना करना पड़ता है। दाईश ने मसीहत को पहले दर्जे का शत्रु घोषित किया है। लाखों मसीही जन ऐसे देशों में रहते हैं जहाँ उन्हें अपने विश्वास के कारण सताया जाता है। कई सरकारें चर्च के विकास को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। बल्कि पारंपरिक इसाई देशों में भी जोशपूर्ण मसीहत के प्रति शत्रुता बढ़ रही है। परमेश्वर के लोगों के लिए शत्रुता कोई नई बात नहीं है। अक्सर लोगों को सफलता, विकास और बड़ी संख्याओं से डराया जाता है। शायद आप भी अपने विश्वास के कारण अपने कार्य के स्थान में या बल्कि अपने परिवार में शत्रुता का सामना कर रहे होंगे। आज का लेखांश शत्रुपूर्ण वातावरण में जीने की सच्चाई को न केवल प्रदर्शित करता है बल्कि वो यह भी बताता है कि हम कैसे जीवित रह सकते हैं और ऐसी शत्रुता के बीच कैसे उन्नति कर सकते हैं।
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