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दिन 38: इनका उपयोग करें या इन्हें गंवा दें

दिन 38: इनका उपयोग करें या इन्हें गंवा दें

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मत्ती 25:14-46, अय्यूब 40:3-42:17, भजन संहिता 18:43-50, माइरा हिन्डले बीसवी सदी के सबसे कुख्यात हत्यारों में से एक थी। उनके अपराध अविश्वसनीय रूप से भयानक थे। फिर भी जब वह कैद में थी तो एक व्यक्ति उससे नियमित रूप से मिला करता था। लॉर्ड लॉन्गफोर्ड (1905-2001) एक विवादास्पद व्यक्ति थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन कैदियों से मुलाकात करने में बिता दिया, जिसमें मायरा हिन्डले भी शामिल हैं। फिर भी परमेश्वर के प्रति और जिन कैदियों से वे मिले थे उनके प्रति उनकी दयालुता और उनकी विश्वासयोग्यता पर कोई भी शक नहीं कर सका। जब उनका देहांत हुआ तो सैकड़ों कैदियों ने उनकी अंतिम विदाई में शोक व्यक्त किया जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के बहिष्कृत लोगों लिए विश्वासयोग्यता से लड़ने में बिता दिया। उन्हें आज के लेखांश में दिये गए यीशु के वचनों से प्रेरणा मिली थी। अपने मरणासन पर उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा, 'क्या तुम्हें पता है बाइबल में सबसे महत्त्वपूर्ण उद्धरण कौन सा है? अपने प्रश्न के जवाब में उन्होंने यीशु के वचनों का उद्धरण करते हुए अपने आखिरी शब्द कहे, 'मैं बन्दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए' (मत्ती 25:36)। जीवन कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है जिसमें आपको जीतना ही है। यह कोई चूहे की दौड़ भी नहीं है। जीवन एक बड़ा सौभाग्य और अवसर है। परमेश्वर ने आपको वरदान और क्षमताएं दी हैं, और वह चाहते हैं कि आप उनका उपयोग करें। उनका उपयोग करें या उन्हें गंवा दें। वह हमारे प्रति विश्वासयोग्य हैं और वह चाहते हैं कि हम भी उनके प्रति विश्वासयोग्य बनें।
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