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  • राग दरबारी: हँसी में छुपी सच्चाई l Raag Darbari by Shri Lal Shukla lPart 17l
    Feb 23 2026

    “जहाँ व्यवस्था गाती है… वहाँ बजता है राग दरबारी” “शिवपालगंज की गलियों से… व्यंग्य की गूँज – राग दरबारी”श्रीलाल शुक्ल द्वारा रचित “राग दरबारी” हिंदी साहित्य का एक अत्यंत चर्चित और व्यंग्यात्मक उपन्यास है। यह उपन्यास स्वतंत्रता के बाद के भारतीय ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं को तीखे व्यंग्य और गहरी सामाजिक समझ के साथ प्रस्तुत करता है। कहानी का केंद्र एक काल्पनिक गाँव “शिवपालगंज” है, जहाँ राजनीति, जातिवाद, शिक्षा, प्रशासन और नैतिक पतन का जीवंत चित्रण मिलता है।उपन्यास का मुख्य पात्र रंगनाथ है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद गाँव आता है और वहाँ की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था को नज़दीक से देखता है। गाँव के प्रभावशाली लोग—जैसे वैद्यजी—सत्ता, चालाकी और स्वार्थ के प्रतीक बनकर उभरते हैं। लोकतंत्र, पंचायत व्यवस्था और शिक्षा जैसे आदर्श संस्थान यहाँ अपने मूल उद्देश्य से भटके हुए दिखाई देते हैं।राग दरबारी केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज का आईना है। इसमें हास्य के साथ-साथ गहरी पीड़ा और सच्चाई छिपी है। लेखक ने सरल भाषा में जटिल सामाजिक समस्याओं को इस तरह प्रस्तुत किया है कि पाठक हँसते-हँसते सोचने पर मजबूर हो जाता है। यही कारण है कि यह उपन्यास आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है जितना अपने समय में था।

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    20 min
  • राग दरबारी: हँसी में छुपी सच्चाई l Raag Darbari by Shri Lal Shukla lPart 16l
    Feb 21 2026

    “जहाँ व्यवस्था गाती है… वहाँ बजता है राग दरबारी” “शिवपालगंज की गलियों से… व्यंग्य की गूँज – राग दरबारी”श्रीलाल शुक्ल द्वारा रचित “राग दरबारी” हिंदी साहित्य का एक अत्यंत चर्चित और व्यंग्यात्मक उपन्यास है। यह उपन्यास स्वतंत्रता के बाद के भारतीय ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं को तीखे व्यंग्य और गहरी सामाजिक समझ के साथ प्रस्तुत करता है। कहानी का केंद्र एक काल्पनिक गाँव “शिवपालगंज” है, जहाँ राजनीति, जातिवाद, शिक्षा, प्रशासन और नैतिक पतन का जीवंत चित्रण मिलता है।उपन्यास का मुख्य पात्र रंगनाथ है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद गाँव आता है और वहाँ की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था को नज़दीक से देखता है। गाँव के प्रभावशाली लोग—जैसे वैद्यजी—सत्ता, चालाकी और स्वार्थ के प्रतीक बनकर उभरते हैं। लोकतंत्र, पंचायत व्यवस्था और शिक्षा जैसे आदर्श संस्थान यहाँ अपने मूल उद्देश्य से भटके हुए दिखाई देते हैं।राग दरबारी केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज का आईना है। इसमें हास्य के साथ-साथ गहरी पीड़ा और सच्चाई छिपी है। लेखक ने सरल भाषा में जटिल सामाजिक समस्याओं को इस तरह प्रस्तुत किया है कि पाठक हँसते-हँसते सोचने पर मजबूर हो जाता है। यही कारण है कि यह उपन्यास आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है जितना अपने समय में था।

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    19 min
  • राग दरबारी: सत्ता, व्यंग्य और गाँव की राजनीति | ऑडियो l Raag Darbari by Shri Lal Shukla lPart 15 l
    Feb 15 2026

    श्रीलाल शुक्ल द्वारा रचित “राग दरबारी” हिंदी साहित्य का एक अत्यंत चर्चित और व्यंग्यात्मक उपन्यास है। यह उपन्यास स्वतंत्रता के बाद के भारतीय ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं को तीखे व्यंग्य और गहरी सामाजिक समझ के साथ प्रस्तुत करता है। कहानी का केंद्र एक काल्पनिक गाँव “शिवपालगंज” है, जहाँ राजनीति, जातिवाद, शिक्षा, प्रशासन और नैतिक पतन का जीवंत चित्रण मिलता है।उपन्यास का मुख्य पात्र रंगनाथ है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद गाँव आता है और वहाँ की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था को नज़दीक से देखता है। गाँव के प्रभावशाली लोग—जैसे वैद्यजी—सत्ता, चालाकी और स्वार्थ के प्रतीक बनकर उभरते हैं। लोकतंत्र, पंचायत व्यवस्था और शिक्षा जैसे आदर्श संस्थान यहाँ अपने मूल उद्देश्य से भटके हुए दिखाई देते हैं।राग दरबारी केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज का आईना है। इसमें हास्य के साथ-साथ गहरी पीड़ा और सच्चाई छिपी है। लेखक ने सरल भाषा में जटिल सामाजिक समस्याओं को इस तरह प्रस्तुत किया है कि पाठक हँसते-हँसते सोचने पर मजबूर हो जाता है। यही कारण है कि यह उपन्यास आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है जितना अपने समय में था।

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    31 min
  • Raag Darbari by Shrilal Shukla | Audiobook l राग दरबारी: लोकतंत्र की असली कहानी | Part 14 l
    Feb 6 2026

    राग दरबारी श्रीलाल शुक्ल का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है, जो भारतीय गाँव की राजनीति, सत्ता और सामाजिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है। कहानी शिवपालगंज गाँव के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ हर संस्था—पंचायत, स्कूल, अस्पताल और प्रशासन—स्वार्थ और चालबाज़ी का शिकार है। लेखक तीखे व्यंग्य और हास्य के माध्यम से दिखाते हैं कि कैसे ताक़तवर लोग व्यवस्था को अपने फ़ायदे के लिए मोड़ लेते हैं, जबकि आम लोग चुपचाप पिसते रहते हैं। यह उपन्यास हँसाते-हँसाते लोकतंत्र और समाज की कड़वी सच्चाई सामने रख देता है।

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    24 min
  • Raag Darbari by Shrilal Shukla | Audiobook l राग दरबारी: लोकतंत्र की असली कहानी | Part 13 l
    Feb 3 2026

    राग दरबारी श्रीलाल शुक्ल का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है, जो भारतीय गाँव की राजनीति, सत्ता और सामाजिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है। कहानी शिवपालगंज गाँव के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ हर संस्था—पंचायत, स्कूल, अस्पताल और प्रशासन—स्वार्थ और चालबाज़ी का शिकार है। लेखक तीखे व्यंग्य और हास्य के माध्यम से दिखाते हैं कि कैसे ताक़तवर लोग व्यवस्था को अपने फ़ायदे के लिए मोड़ लेते हैं, जबकि आम लोग चुपचाप पिसते रहते हैं। यह उपन्यास हँसाते-हँसाते लोकतंत्र और समाज की कड़वी सच्चाई सामने रख देता है।

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    16 min
  • राग दरबारी: सत्ता, व्यंग्य और गाँव की राजनीति | ऑडियो l Part 12
    Feb 1 2026

    राग दरबारी श्रीलाल शुक्ल का प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास है, जो भारतीय गाँव की राजनीति, सत्ता और सामाजिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है। कहानी शिवपालगंज गाँव के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ हर संस्था—पंचायत, स्कूल, अस्पताल और प्रशासन—स्वार्थ और चालबाज़ी का शिकार है। लेखक तीखे व्यंग्य और हास्य के माध्यम से दिखाते हैं कि कैसे ताक़तवर लोग व्यवस्था को अपने फ़ायदे के लिए मोड़ लेते हैं, जबकि आम लोग चुपचाप पिसते रहते हैं। यह उपन्यास हँसाते-हँसाते लोकतंत्र और समाज की कड़वी सच्चाई सामने रख देता है।

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    20 min
  • Raag Darbari l राग दरबारी: शिवपालगंज की व्यंग्य गाथा | श्रीलाल शुक्ल का कालजयी उपन्यास l part 11l
    Jan 31 2026

    क्या एक गाँव पूरे देश का आईना हो सकता है?हिंदी साहित्य के महान व्यंग्यकार, श्रीलाल शुक्ल का कालजयी उपन्यास 'राग दरबारी' एक ऐसी ही कहानी है, जिसे सुनकर आप हँसेंगे भी और सोचेंगे भी।इतिहास का शोध छात्र रंगनाथ, शहर के आदर्शों से भरा, स्वास्थ्य लाभ के लिए अपने मामा वैद्यजी के गाँव शिवपालगंज पहुँचता है। वैद्यजी ऊपर से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, लेकिन असल में गाँव की राजनीति के बेताज बादशाह हैं।रंगनाथ जल्द ही देखता है कि जिस ग्रामीण सादगी की उसने कल्पना की थी, वह एक क्रूर यथार्थ है। शिवपालगंज की हर संस्था—सहकारी समिति, इंटर कॉलेज और यहाँ तक कि पुलिस थाना भी—वैद्यजी और उनके शागिर्दों, जैसे बद्री पहलवान और छोटे पहलवाल के इशारों पर नाचती है।यह उपन्यास स्वतंत्रता के बाद के भारत में पनपे भ्रष्टाचार, राजनीतिक तिकड़म, शिक्षा प्रणाली की दुर्दशा और एक आम आदमी की बेबसी पर एक तीखा व्यंग्य है। यह कहानी सिर्फ शिवपालगंज की नहीं, बल्कि हर उस जगह की है जहाँ शक्ति, छल और कपट के 'दरबारी राग' बजते हैं।सुनिए, रंगनाथ कैसे धीरे-धीरे अपने आदर्शों को टूटते देखता है और 'व्यवस्था' के इस संगीत में खुद को असहाय पाता है। #RaagDarbari #ShrilalShukla #HindiAudiobook #HindiNovel #PoliticalSatire #Vyangya #Shivpalganj #IndianLiterature #ClassicHindiStory

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    24 min
  • Raag Darbari l राग दरबारी: शिवपालगंज की व्यंग्य गाथा | श्रीलाल शुक्ल का कालजयी उपन्यास l part 10l
    Jan 27 2026

    क्या एक गाँव पूरे देश का आईना हो सकता है?हिंदी साहित्य के महान व्यंग्यकार, श्रीलाल शुक्ल का कालजयी उपन्यास 'राग दरबारी' एक ऐसी ही कहानी है, जिसे सुनकर आप हँसेंगे भी और सोचेंगे भी।इतिहास का शोध छात्र रंगनाथ, शहर के आदर्शों से भरा, स्वास्थ्य लाभ के लिए अपने मामा वैद्यजी के गाँव शिवपालगंज पहुँचता है। वैद्यजी ऊपर से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, लेकिन असल में गाँव की राजनीति के बेताज बादशाह हैं।रंगनाथ जल्द ही देखता है कि जिस ग्रामीण सादगी की उसने कल्पना की थी, वह एक क्रूर यथार्थ है। शिवपालगंज की हर संस्था—सहकारी समिति, इंटर कॉलेज और यहाँ तक कि पुलिस थाना भी—वैद्यजी और उनके शागिर्दों, जैसे बद्री पहलवान और छोटे पहलवाल के इशारों पर नाचती है।यह उपन्यास स्वतंत्रता के बाद के भारत में पनपे भ्रष्टाचार, राजनीतिक तिकड़म, शिक्षा प्रणाली की दुर्दशा और एक आम आदमी की बेबसी पर एक तीखा व्यंग्य है। यह कहानी सिर्फ शिवपालगंज की नहीं, बल्कि हर उस जगह की है जहाँ शक्ति, छल और कपट के 'दरबारी राग' बजते हैं।सुनिए, रंगनाथ कैसे धीरे-धीरे अपने आदर्शों को टूटते देखता है और 'व्यवस्था' के इस संगीत में खुद को असहाय पाता है। #RaagDarbari #ShrilalShukla #HindiAudiobook #HindiNovel #PoliticalSatire #Vyangya #Shivpalganj #IndianLiterature #ClassicHindiStory

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    34 min