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Baba ji Vijay Vats

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Di: Baba ji Vijay Vats
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A proposito di questo titolo

The purpose of creating this channel is to show people the right path, which keeps raising many questions in their mind, it is our full effort to get some answers. Whatever audio you are listening to here have not a motive to hurt the feelings of any person, religion, or community. That is why if someones gets hurt due to our efforts, then we apologize in advance.Baba ji Vijay Vats Spiritualità
  • 11 Feb 26 - संथारा क्या है? क्या यह आत्महत्या है? उपवास और अनशन: क्या शरीर को कष्ट देना सही है?
    Feb 10 2026
    00:00 - संथारा: आत्महत्या या महा तपश्चर्या? (Santhara: Suicide or Great Penance?)02:20 - शरीर और आत्मा का भेद (Difference between body and soul)04:00 - सावरकर और विनोबा भावे का संथारा (Santhara of Savarkar and Vinoba Bhave)07:00 - उपवास और व्रत का महत्व (Importance of Fasting and Vrat)10:00 - संथारा: इंद्रियों का व्यर्थ होना (Santhara: When senses become useless)15:00 - आत्महत्या: हताशा और अधूरी इच्छाएं (Suicide: Despair and unfulfilled desires)18:00 - 6 लोगों की हत्या और सुसाइड: एक सच्ची घटना (Murder of 6 people and suicide: A true incident)22:00 - जीवन की आपाधापी और आराम (Life's hustle and rest)26:30 - सोने-चांदी के भाव और शेयर मार्केट (Gold-Silver prices and Share Market)32:00 - "आग बनी सावन की बरखा" - हताशा का गीत (Song: Fire became the rain of Sawan) 🎶41:50 - "महल उदास और गलियां सूनी" - जीने की इच्छा खत्म होना (Song: Palace sad and streets deserted) 🎶46:00 - महावीर और बुद्ध की जीने की इच्छा (Will to live of Mahavira and Buddha)49:00 - मंदिर गिरता फिर बन जाता: दिल मत तोड़ना (Temple falls and rebuilds: Don't break a heart)---सारांश (Summary)इस वीडियो में बाबाजी जैन धर्म की 'संथारा' प्रथा और आत्महत्या के बीच के गहरे अंतर को स्पष्ट करते हैं। वे समझाते हैं कि आत्महत्या हताशा और अधूरी इच्छाओं का परिणाम है, जबकि संथारा एक महा तपश्चर्या है जहाँ व्यक्ति शरीर और आत्मा के भेद को जानकर स्वेच्छा से देह त्यागता है। बाबाजी सावरकर और विनोबा भावे का उदाहरण देते हैं। वे एक दुखद घटना का जिक्र करते हैं जहाँ एक व्यक्ति ने अपने पूरे परिवार को मारकर आत्महत्या कर ली, और बताते हैं कि कैसे एक सही सलाह उसे बचा सकती थी। अंत में, बाबाजी वैराग्य और जीने की इच्छा के समाप्त होने पर मार्मिक गीतों के माध्यम से प्रकाश डालते हैं।---मुख्य विषय (Topics)* संथारा और आत्महत्या का भेद (Difference between Santhara and Suicide)* उपवास और स्वास्थ्य (Fasting and Health)* शरीर और आत्मा का संबंध (Relationship between Body and Soul)* हताशा और मानसिक तनाव (Despair and Mental Stress)* वैराग्य और जीवन की निरर्थकता (Renunciation and Futility of Life)* मंदिर और दिल का महत्व (Importance of Temple and Heart)---Shorts Style Topics- संथारा क्या है? क्या यह आत्महत्या है? [02:20] 🧘‍♂️💀- सावरकर और विनोबा भावे ने संथारा क्यों लिया? [04:00] 🕰️🙏- उपवास और अनशन में क्या फर्क है? [07:00] 🍽️🚫- 6 लोगों की हत्या और सुसाइड: क्या इसे रोका जा सकता था? [18:00] 🛑📞- "आग बनी सावन की बरखा" - सुसाइड करने वाले का दर्द [32:00] 🌧️🔥- मंदिर तोड़ दो पर दिल मत तोड़ना: बाबाजी का संदेश [49:00] 💔🕌---Music Segments (Geet/Shayari)- 🎶 "आग बनी सावन की बरखा, फूल बने अंगारे" - [37:15]- 🎶 "महल उदास और गलियां सूनी, चुप-चुप हैं दीवारें" - [41:57]- 🎶 "दिल क्या उजड़ा दुनिया ...
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    41 min
  • 10 Feb 26 - बाबाजी ब्रेसलेट और रत्न क्यों पहनते हैं? रत्नो और ब्रेसलेट का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व
    Feb 10 2026
    00:00 - बाबाजी ब्रेसलेट और रत्न क्यों पहनते हैं? (Why does Baba Ji wear bracelets and gems?)04:00 - शरीर की रक्षा: कर्तव्य और विज्ञान (Protection of Body: Duty and Science)09:00 - कृष्ण, राम और तीर्थंकर भी रत्न पहनते थे (Krishna, Ram, and Tirthankaras also wore gems)14:00 - नेगेटिव एनर्जी और शरीर का संरक्षण (Negative Energy and Preservation of Body)18:00 - "सोचता हूँ अपने घर को देखकर" - विरह गीत (Song: Thinking about my home) 🎶23:00 - बुद्ध और महावीर के पास सब कुछ था, फिर भी त्याग क्यों? (Buddha and Mahavira had everything, why renunciation?)29:00 - विश्वामित्र का यज्ञ और राक्षसों की बाधा (Vishwamitra's Yajna and Obstacles by Demons)35:00 - दूसरों को दुखी करने में सुख: राजनीति का सच (Pleasure in hurting others: Truth of Politics)45:00 - "ना झटको जुल्फ से पानी" - भावनाओं का आहत होना (Song: Do not shake water from hair) 🎶52:00 - जितना मिलेगा खा लेंगे: बुद्ध का वैराग्य (Will eat whatever is available: Buddha's Dispassion)58:00 - शराब नहीं छूटती: बाबाजी का जवाब (Can't quit alcohol: Baba Ji's Answer)01:05:00 - "तुलना ताही सकल मिलै, जो सुख लव सत्संग" (Comparing all joys with a moment of Satsang)01:16:00 - "जद मेरी अर्थी उठा के चलेंगे" - अंतिम विदाई गीत (Song: When they carry my bier) 🎶---सारांश (Summary)इस वीडियो में बाबाजी एक शिष्य के प्रश्न का उत्तर देते हैं कि एक सिद्ध संत होने के बावजूद वे ब्रेसलेट और रत्न क्यों पहनते हैं। वे समझाते हैं कि जैसे शरीर को भोजन की आवश्यकता होती है, वैसे ही नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा के लिए रत्नों का उपयोग विज्ञान सम्मत है। बाबाजी राम, कृष्ण और तीर्थंकरों का उदाहरण देते हैं। वे विश्वामित्र के यज्ञ में बाधा डालने वाले राक्षसों की तुलना आज के विघ्न संतोषियों से करते हैं। बाबाजी अपने जीवन के संघर्ष, भोजन त्याग और शरीर को टिकाए रखने के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हैं। अंत में, वे अपनी मृत्यु के बाद के दृश्य का मार्मिक चित्रण एक गीत के माध्यम से करते हैं।---मुख्य विषय (Topics)* रत्नों और ब्रेसलेट का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व (Spiritual & Scientific importance of Gems/Bracelets)* शरीर रक्षा और कर्तव्य (Body Protection and Duty)* नेगेटिव एनर्जी और सुरक्षा कवच (Negative Energy and Protective Shield)* संतों के जीवन में बाधाएं (Obstacles in the lives of Saints)* त्याग और वैराग्य की गहराई (Depth of Renunciation and Dispassion)* राजनीति और दूसरों को दुख देना (Politics and Hurting others)* मृत्यु और अंतिम सत्य (Death and Ultimate Truth)---Shorts Style Topics- बाबाजी ब्रेसलेट क्यों पहनते हैं? सच जानिये [05:40] 💎🛡️- क्या राम और कृष्ण भी रत्न पहनते थे? [09:00] 👑💍- विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षस हड्डियां क्यों फेंकते थे? [29:00] 🔥💀- "जद मेरी अर्थी उठा के चलेंगे" - बाबाजी का इमोशनल गीत [01:16:00] ...
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    1 ora e 19 min
  • 9 Feb 26 - भगवान से भगवान को मांगना सही है? मांग और वासना का मनोविज्ञान !!
    Feb 8 2026
    00:00 - परमात्मा से परमात्मा को मांगना: क्या यह सही है? (Asking God from God: Is it right?)02:50 - मांग एक वासना है, लोभ है (Demand is lust, it is greed)05:30 - राजा और भिक्षुक की कहानी: सिंहासन का लोभ (Story of King and Beggar: Greed for Throne)18:00 - सिंहासन का सच: कोढ़ और खारिश (Truth of the Throne: Leprosy and Itching)24:30 - बिन मांगे मोती मिले: बच्चे की तरह बनो (Unasked pearls received: Be like a child)34:30 - कृष्ण और रुक्मिणी: भक्त की रक्षा (Krishna and Rukmini: Protecting the devotee)45:00 - हमारे देश में इतने त्यौहार क्यों हैं? (Why so many festivals in our country?)48:00 - शंकराचार्य और विधवा ब्राह्मणी: कनकधारा स्तोत्र (Shankaracharya and Widow: Kanakdhara Stotram)55:00 - जीसस और भोजन: जरूरत vs लोभ (Jesus and Food: Need vs Greed)01:00:50 - मांगो मत, बिन मांगे सब मिलेगा (Don't ask, receive everything unasked)---सारांश (Summary)इस वीडियो में बाबाजी एक भक्त के प्रश्न का उत्तर देते हैं कि क्या परमात्मा से परमात्मा को मांग लेना सही है। वे बताते हैं कि 'मांग' अपने आप में एक वासना और लोभ है, चाहे वह पदार्थ की हो या परमात्मा की। बाबाजी एक राजा और भिक्षुक की कहानी सुनाते हैं, जहाँ भिक्षुक राजा का सिंहासन मांग लेता है लेकिन अंततः कोढ़ का शिकार हो जाता है। वे शंकराचार्य और कनकधारा स्तोत्र के प्रसंग से समझाते हैं कि मांग लोभ से नहीं, जरूरत से उठनी चाहिए। अंत में, बाबाजी कहते हैं कि बिन मांगे ही सब मिलता है, जैसे बच्चे को माँ से।---मुख्य विषय (Topics)* मांग और वासना का मनोविज्ञान (Psychology of Demand and Lust)* परमात्मा की प्राप्ति और लोभ (Attaining God and Greed)* राजा और भिक्षुक की शिक्षाप्रद कहानी (Instructive story of King and Beggar)* शंकराचार्य और कनकधारा स्तोत्र (Shankaracharya and Kanakdhara Stotram)* जीसस क्राइस्ट का प्रसंग (Episode of Jesus Christ)* त्यौहारों का मनोवैज्ञानिक कारण (Psychological reason for festivals)* समर्पण और बिन मांगे प्राप्ति (Surrender and receiving unasked)---Shorts Style Topics- परमात्मा को मांगना सबसे बड़ा लोभ क्यों है? [04:00] 🤑🙏- राजा का सिंहासन मांगने पर भिखारी का क्या हाल हुआ? [18:00] 👑😖- शंकराचार्य ने विधवा के घर सोने की बारिश क्यों करवाई? [48:00] 🌧️💰- जीसस ने सिर्फ एक वक्त का खाना क्यों मांगा? [55:00] 🍞✝️- भारत में इतने त्यौहार क्यों मनाए जाते हैं? [45:00] 🎉🇮🇳- बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख [24:30] 🤲💎---Music Segments (Geet/Shayari)- 🎶 "तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं मांगी थी, कैद मांगी थी रिहाई तो नहीं मांगी थी" - [13:36]---वीडियो के लिए शीर्षक (Titles)1. क्या भगवान से भगवान को मांगना सही है? बाबाजी का जवाब2. राजा और भिखारी: लालच का अंजाम क्या होता है?3. बिन मांगे मोती मिले: मांगना ...
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    1 ora e 3 min
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