क्या 'खाना खा लो' कहना घर में क्लेश लाता है? | शब्दों की गुप्त ऊर्जा copertina

क्या 'खाना खा लो' कहना घर में क्लेश लाता है? | शब्दों की गुप्त ऊर्जा

क्या 'खाना खा लो' कहना घर में क्लेश लाता है? | शब्दों की गुप्त ऊर्जा

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राम-राम दोस्तों। क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे रोज़मर्रा के शब्द हमारे जीवन और घर के माहौल को कैसे बदल रहे हैं? शास्त्रों में कहा गया है—'शब्द ब्रह्म हैं।' इस एपिसोड में हम जानेंगे कि हर घर में रोज़ बोला जाने वाला एक साधारण सा वाक्य—'खाना खा लो'—कैसे हमारे अवचेतन मन (Subconscious Mind) और यूनिवर्स की ऊर्जा को प्रभावित करता है। 'खाना' और 'भोजन' शब्द के बीच का Etymological और मनोवैज्ञानिक अंतर आपके जीवन में सुख-शांति कैसे ला सकता है, इसे एक बहुत ही व्यावहारिक फोन कॉल के उदाहरण से समझिए। पूरा एपिसोड सुनिए और अपनी भाषा की ऊर्जा को बदलिए।"

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