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Ghaswali !

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वासना एगो अइसन शब्द जवना से देवता लोग भी बांचल नइखन तs मानुस के बतिये छोड़ दिहल जाए बाकिर वासना कइसे प्रेम में बदलेला एक्र बढ़िया उदाहरण एह कहनी से मिलेला । प्रेमचन्द जी के कृति से इ एगो बेजोड़ कहानी जवन बतावे ले की प्रेम में वासना के कवनो स्थान नइखे प्रेम प्रेम होला गंगा जी के पानी नियन निर्मल । एह कहनी में एगो गरीबदलित परिवार के कहनी बा नायिका के मरद जइसे तैसे आपन गुजारा करत बा एक्का चलाई के आ ओकर ओकर मेहरारू बाजार में घास जवन जानवरन के चारा होला ओकरा के बेचत बिया, ओही गाँव के एगो मनचला आदमी जवन बडका जमीदार रहेला ओकरा पर आंखी गड़वले रहेला आखिर का होला एह एह कहनी में का उ जमीदार आपन मंसूबा में सफल हो पावेला जाने खातिर सुनी इ बेहतरीन कहनी के

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