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Gautam Buddha

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Di: Neil Dcunha
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  • क्रोध एक दुश्मन | Anger An Enemy | Moral Short Story by Gautam Buddha
    Jul 14 2022
    एक समय की बात है भगवान गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे हुए थे और उन्हें उपदेश दे रहे थे। तब उन्होंने अपने शिष्यों से कहा, “क्रोध इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। क्रोध करने वाला व्यक्ति खुद को हानि पहुंचाता ही है लेकिन दूसरों को भी हानि पहुंचाता है। वह प्रतिशोध की आग में जलता है और अपने जीवन को बर्बाद करता है।” उनके उपदेश खत्म हो जाने के बाद उनके शिष्यों में से एक शिष्य खड़ा होता है और उसे बोलता है, “तू एक ढोंगी है! तेरी बातें मनुष्यों के रहन-सहन से विपरीत है। तू जो भी कहता है उसे अपने जीवन में अनुसरण नहीं करता और दूसरों को यह सब करने कहता है।” जब उसका वह शिष्य गौतम बुद्ध को उल्टी-सीधी बातें कह रहा था तब गौतम बुद्ध ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और वे शांत बैठे थे। लेकिन ऐसे में वह व्यक्ति और भी ज्यादा गुस्सा हो गया और गुस्से में आकर उसने गौतम बुद्ध के मुंह पर थूक दिया। इसके बाद भी महात्मा गौतम बुद्ध को गुस्सा नहीं आया और वे शान्त थे। उन्होंने अपने चेहरे से थूक को पोछा और वह चुपचाप बैठ गए। यह सब देखकर उस शिष्य को समझ नहीं आया कि वह क्या करेगा। गुस्से में आकर वह उस जगह को छोड़कर चला गया और अगले दिन अपने घर पहुंचा। जैसे ही वह अपने घर पहुंचा तब तक उसका दिमाग शांत हो चुका था। दिमाग के सांत होते ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसने कितनी बड़ी गलती की है। उSसे पाप हुआ है। वह खुद को मन ही मन कहने लगा, “यह मैंने क्या कर दिया। मैंने महात्मा बुद्ध का अपमान किया है। ऐसा पाप मैं कैसे कर सकता हूं। मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी। मुझे जाकर उनसे माफ़ी मांगनी होगी।” यह कहकर वह तुरंत हि गौतम बुद्ध के पास चला गया लेकिन गौतम बुद्ध उस स्थान पर नहीं थे। ऐसे में वह शिष्य जगह-जगह भटककर उन्हें खोजने लगा। जैसे ही उसे महात्मा बुद्ध मिले तो वह उनके पैरों पर गिर गया और उनसे कहने लगा, “मुझे माफ कर दीजिए। मुझसे गलती हुई है। मैंने आपका अपमान किया है। मैंने यह बहुत बड़ा पाप किया है।” यह सब देखकर गौतम बुद्ध ने उससे कहा, “शांत हो जाओ, क्या बात है मुझे बताओ? तुम कौन हो?” गौतम बुद्ध के यह पूछने पर वह शिष्य चौक गया। वह सोचने लगा की महात्मा बुद्ध मुझे कैसे भुल सकते है। मैने तो उनका अपमान किया था। यह सोचकर उसने महात्मा बुद्ध से पूछा, “मैं वही शिष्य हूं जिसnae कल आपका ...
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