Fredrich Nietzsche का 'The Anti-Christ' (हिन्दी में) -1 copertina

Fredrich Nietzsche का 'The Anti-Christ' (हिन्दी में) -1

Fredrich Nietzsche का 'The Anti-Christ' (हिन्दी में) -1

Ascolta gratuitamente

Vedi i dettagli del titolo

A proposito di questo titolo

प्रिय श्रोतागण, Nietzsche दर्शन की इस नई playlist में आपका स्वागत है. आज हम उनकी किताब the antichrist शुरू करने जा रहे हैं. मैं आपके सामने हिंदी अनुवाद first person में प्रस्तुत करूँगा.  इसलिए जब मैं ‘मैं’ बोलूं, आप समझें की Nietzsche बोल रहे हैं. तो आइये, बिना देर किए शुरू करें.   प्रस्तावना ये किताब सभी के लिए नहीं हैं. मैं समझता हूं की इस किताब को पढ़ने वाले अभी जीवित नहीं हैं. हालांकि जिन्होंने मेरी zarathustra पढ़ी हो, वे शायद मेरी बातें समझ सकें. लेकिन अधिकांश लोग ये सब सुनने को अभी तैयार नहीं. मैं मानता हूं की मेरे श्रोता कल के बाद वाले दिन आएंगे. कुछ लेखक मरने के बाद पैदा होते हैं. मैं जो आपसे कहने जा रहा है, उसको समझने की कुछ जरूरी शर्तें हैं। और साथ ही ये भी सच है की जो इन शर्तों को पूरा करते हैं वे इस किताब को अधूरा छोड़कर नहीं जा पाएंगे. 1.आगे बढ़ने से पहले आइए हम एक दूसरे के चेहरे देख लें. मैं कौन हूं? कहाँ खड़ा हूं? आधुनिक मानव को इसका कुछ पता नहीं. इस आधुनिकता ने हमें बीमार किया है- इसकी निष्क्रिय शांति, कायरतापूर्ण मध्य मार्ग, और ये आधुनिक हाँ और न की सदाचारी सड़ांध. ये सहिष्णुता जो सब कुछ समझती है, सब कुछ माफ़ कर देती है. हमें बर्फीले तूफ़ानों के बीच रहना मंजूर है  लेकिन इस आधुनिक सदाचार से हमारा कोई लेना देना नहीं. हममें अदम्य साहस भरा है, न हम खुद पर नरमी बरतते हैं और न औरों पर. लेकिन एक लंबे समय तक हमें पता तक नहीं था की अपने साहस का क्या करना है. हम दयनीय हो गए, लोग हमें नकारा-भाग्यवादी समझने लगे. हमारा भाग्य क्या था- प्राचुर्य, युद्ध, शक्ति और बल. हम प्यासे रहे हैं बिजली और गति के. जितना बन सका दुर्बलता और पराधीनता से बचते रहे हैं. हमारी हवाओं में एक तूफ़ान दफ़न था, हमारी भंगिमा पर एक कालिमा छाने लगी थी- क्योंकि हमारे सामने कोई पथ दृष्टिगोचर नहीं था. हमारी ख़ुशी का formula- एक हाँ, एक ना, एक सीधी रेखा, एक गंतव्य. 2. अच्छा क्या है? हर ऐसी चीज जो हमारी शक्ति बढ़ाती है, अच्छी है. शक्तिशाली होना अच्छा है. शक्तिशाली होने की इच्छा अच्छी है. बुरा क्या है- दुर्बलता से निकली हर चीज बुरी है. ख़ुशी क्या है- शक्ति का बढ़ना ख़ुशी है. प्रतिरोध पर विजय प्राप्त करना ख़ुशी है. संतोष नहीं! और ज्यादा शक्ति; शांति नहीं युद्ध; सदाचार नहीं दक्षता, सद्गुण नहीं निपुणता, शुचिता नहीं कौशल. जो दुर्बल और असफल ...
Ancora nessuna recensione