Badki Didi Ka Yaksh Prashan (भाग 2) copertina

Badki Didi Ka Yaksh Prashan (भाग 2)

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हमनी के समाज में आजो विधवा लोग के इस्थिति नीक नइखे। तमाम तरह के पाबंदी आ दरकियानूसी ख्याल से भरल ढ़ेरे बात बाड़ी सs। जब केहु विधवा होत बा उ एगो तरह से श्राप मानल जाला आ ओहू में अगर ओकरा खाली बेटिये होखे तs, समाज विधवा भइला के चलते ओकर कोढ़ में खाज अस के इस्थिति बन जाला ।

एह कहानी में दयानंद पाण्डेय जी समाज के चेहरा पs एगो बड़का झापड़ लगवले बानी! सुनि इ कहानी के दूसरा आ आखिरी भाग ...............

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