पुरुषोत्तम मास || अधिक मास मे दान, पुन्य को जानो
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अधिकमास को कुछ जगहों पर मलमास के नाम से भी जानते हैं। इसके अलावा इस महीने को पुरुषोत्तम के नाम से भी जानते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मालिनमास होने के कारण कोई भी देवता इस माह में पूजा नहीं करवाना चाहता था। इस माह का देवता कोई भी नहीं बनना चाहता था। तब मलमास ने स्वयं भगवान विष्णु से निवेदन किया था। तब भगवान विष्णु ने मलमास को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया था। तभी से इस माह को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जानते हैं। जानिए क्यों दिया गया अधिकमास नाम- सूर्य साल 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। दोनों सालों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर तीन साल में करीब एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है। इस अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया। पंडित राजेश शर्मा उज्जैन मप्र