Chourangi copertina

Chourangi

Anteprima

Attiva il tuo abbonamento Audible con un periodo di prova gratuito per ottenere questo titolo a un prezzo esclusivo per i membri

Acquista a 10,29 € e inizia la prova
Dopo 30 giorni (60 per i membri Prime), 9,99 €/mese. Puoi cancellare ogni mese
Dopo esserti registrato per un abbonamento, puoi acquistare questo e tutti gli altri audiolibri nel nostro catalogo esteso, ad un prezzo scontato del 30%
Ottieni accesso illimitato a una raccolta di oltre migliaia di audiolibri e podcast originali.
Nessun impegno. Cancella in qualsiasi momento e conserva tutti i titoli acquistati.

Chourangi

Di: Shankar
Letto da: Atul Vishnoi
Acquista a 10,29 € e inizia la prova

Dopo 30 giorni, 9,99 €/mese. Cancella quando vuoi.

Acquista ora a 14,82 €

Acquista ora a 14,82 €

चौरंगी सुखी और दुखी, सहयोगी और विरोधी, उत्कर्ष और पतन, आदर्श और व्यवहार, व्यावसायिक और मानवीय - बहुविध मानव चरित्रों की कथा है यह उपन्यास, चौरंगी। शाहजहाँ होटल के माध्यम से लेखक केवल कलकत्ता का चित्र नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव व्यवहार का चित्र प्रस्तुत करता है। इस उपन्यास में इतने अधिक विविधरंगी चरित्र हैं कि इसे सहज ही मानव जीवन की महागाथा कहा जा सकता है पर महागाथाओं की तरह इसमें कोई महानायक नहीं है इसीलिए यह उपन्यास कोई आदर्श भी नहीं रचता। यह केवल परत-दर-परत मानवीय व्यवहार के विभिन्न पहलुओं को खोलता चलता है। यही वजह है कि कई बार एक ही व्यक्ति के चरित्र के दो रूप उभरकर सामने आते हैं। महानगरीय जीवन की महत्त्वकांक्षाओं के बीच किस तरह से इच्छाएँ और संबंध दम तोड़ जाते हैं यह इसमें बखूबी देखा जा सकता है। परन्तु कभी भी सब कुछ नहीं टूटता, कभी भी सब कुछ नष्ट नहीं होता। नष्ट होने के बीच बहुत कुछ ऐसा बचा रहता है जो नए निर्माण की आशा को जीवित रखता है। बहुरंगी चरित्रों की इस महागाथा को बाँधे रखनेवाला एकमात्र सूत्रवा है, सहज मानवीय स्नेह। शाहजहाँ होटल में काम करते हुए नायक को सबसे अधिक ऐश्वर्य जो मिला वह था साथ काम करनेवालों का स्नेह। और यही स्नेह सब कुछ नष्ट हो जाने के बीच भी निर्माण की आशा को बरकरार रखता है। पारदर्शी: के.जी. सुब्रह्मण्यम संयोजक: जगमोहन सिंह रावत
adbl_web_anon_alc_button_suppression_t1
Ancora nessuna recensione