खोते संस्कार, रोते मां-बाप एक कड़वी हकीकत... copertina

खोते संस्कार, रोते मां-बाप एक कड़वी हकीकत...

खोते संस्कार, रोते मां-बाप एक कड़वी हकीकत...

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क्या आज के डिजिटल युग में मोबाइल की 'रील्स' मां के 'संस्कारों' पर भारी पड़ रही हैं? इतिहास गवाह है कि जो हम बोते हैं, वही काटते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के संस्कारों से लेकर आज के इंदौर की घटनाओं तक, आइए गहराई से समझते हैं कि क्यों मां को पहला गुरु कहा गया है और आज हम कहाँ चूक रहे हैं। सोचिएगा जरूर।"

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